Sunday, January 2, 2011

uttrakhand kavita

नया साल का अभिनदन मा
सब दागडिया मिल कार बचन करा
कदम से कदम मिली कन जोला
जग जिवन कु उधर करा

ना राली तेरी बात ना राली मेरी बात
जात धर्म कु मान करा
ऊच नीच कु भेद भाव छोडा
नारी जाती कु भी मान करा

कंधो से कन्धा मिले कन चला हम

दुश्मन तय हम दूर करला
नर और नारी को जब साथ होलू
जग जिवन कु उधार करला

संजय गढ़वाली

Saturday, January 1, 2011

सब तय नया साल कि ह्रादिक शुभ कामनाए

















सब तय नया साल कि ह्रादिक शुभ कामनाए
12 महिना ,
52 हप्पता,
365 दिन,
8760 घंटा ,
52600 मिनट ,
3153600 सेकंड्स

महिना, हप्पता, दिन, घंटा, मिनट ,सेकण्ड
भला और खूब बितानी आप का घर मा सुख हो ख़ुशी से राया
आप ये प्राथना छो कनु भगवान से आप का जिवन मगलमय हो
जय बद्री बिशाल ,जय केदार नाथ, जय डाडा नागराजा ,जय पांच नाम देवतो

Saturday, December 25, 2010

उत्तराखंड: कभी खुशी कभी गम में बीता गुजरा साल

अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक केन्द्रों के लिये पूरी दुनिया भर में मशहूर उत्तराखंड में गुजरा साल कभी खुशी और कभी गम के बीच बीता। जहां गुजरे वर्ष 2010 ने नन्हें उत्तराखंड की झोली में कई खुशियां डालीं वहीं कई सालों तक याद रखने वाली टीस भरा गम भी दे गया।

बीते साल की शुरूआती चार महीनों में उत्तराखंड में जहां दुनिया का सबसे बड़ा मेला महाकुंभ एक के बाद एक शाही स्नान को शानदार और शांतिपूर्वक सफल कराकर लाखों लोगों को राहत और खुशियां दे गया, वहीं आखिरी दिनों में राज्य में हुई प्रलयंकारी वर्षा, भूस्खलन और दुर्घटनाओं ने 200 से भी अधिक लोगों को मौत की नींद सुलाकर गहरा दर्द दे दिया।

बीते साल के 14 जनवरी से शुरू हुये महाकुंभ मेले में चार महीनों के दौरान आठ करोड़ 27 लाख 71 हजार लोगों ने गंगा में पूरी आस्था और शांति के साथ डुबकी लगाई। लेकिन सितम्बर और अक्टूबर महीने में राज्य में हुई वर्षा ने 140 सालों का रिकार्ड तोड़ते हुये 200 लोगों को मौत की नींद सुलाया, 600 से भी अधिक लोगों को घायल कर दिया तथा हजारों लोगों को बेघर होने पर मजबूर किया। इस हादसे से राज्य को बेहद गम का सामना करना पड़ा था।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के नेतृत्व में बीते साल दुनिया का पहला हिमनद प्राधिकरण गठित किया गया जो राज्य के 1500 से अधिक हिमनदों का अध्ययन करेगा। इस अध्ययन में दुनिया के कई विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। लेकिन उद्योगपतियों के लिये बीता साल उदासी लेकर आया जब केन्द्र सरकार ने मार्च में खत्म हुये विशेष औद्योगिक पैकेज की अवधि को बढ़ाने से इन्कार कर दिया। राज्य द्वारा कई बार अनुरोध किये जाने के बावजूद पैकेज राजनैतिक दांव पेंच के बीच फंस कर रह गया।

राज्य में तीन बड़ी बिजली परियोजनाओं का बंद होना भी उदासी का सबब बना। केन्द्र सरकार ने पर्यावरण रक्षा की दुहाई देते हुये 600 मेगावाट वाली लोहारीनागपाला परियोजना पर पांच अरब रूपये खर्च करने के बावजूद इसे बंद कर दिया। इसके साथ साथ राज्य सरकार की दो परियोजनाओं 480 मेगावाट वाली पाला मनेरी और 381 मेगावाट वाली भैरोंघाटी को भी बंद कर दिया। बिजली की संभावनायें समाप्त होने से लोगों को न केवल गम रहा बल्कि लोगों ने इसका पुरजोर विरोध भी किया।

केन्द्रीय योजना आयोग ने उत्तराखंड में बीते साल के दौरान घरेलू पर्यटकों की आमद में रिकार्ड बढ़ोत्तरी हासिल करने के लिये हिमालयी राज्यों में पहला स्थान प्रदान किया। राज्य में प्रलयंकारी वर्षा के बावजूद चार धाम मंदिरों में शामिल यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में श्रद्धालुओं के कारण हुई रिकार्ड आमदनी ने जहां पर्वतीय लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी वहीं प्राकतिक आपदा से त्रस्त उत्तराखंड ने भरपाई के लिये 21,000 हजार करोड़ रूपये की केन्द्र से मांग की लेकिन उसे मात्र 500 करोड़ रूपये मिलना मलाल का कारण बना। निशंक ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक से मुलाकात की लेकिन केन्द्र ने उन्हें गुजरे साल में खाली हाथ ही रखा। हालांकि निशंक अभी तक उम्मीद लगाये हुये हैं कि उन्हें राहत मिलेगी।

उत्तराखंड में गुजरे साल गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिये स्पर्श गंगा परियोजना की शुरूआत की गयी और इसके लिये ड्रीम गर्ल के नाम से मशहूर अदाकारा हेमामालिनी को ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया जो लोगों के लिये खुशी का कारण बना।

इसी तरह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को बाघ संरक्षण के लिये उत्तराखंड ने वाइल्ड लाइफ वार्डेन बनाकर राज्यवासियों को एक नायाब तोहफा दिया। राज्य की राजधानी में स्थित भारतीय सैन्य अकादमी ने अपनी स्थापना काल से अब तक पचास हजार से अधिक सैन्य अधिकारी देने का आंकड़ा गुजरे साल के दौरान ही पूरा किया जिससे न केवली उत्तराखंड को बल्कि पूरे देश को इस अकादमी पर नाज हुआ। राज्य में पूरा साल कभी खुशी कभी गम के बीच बीता लेकिन पर्वतीय लोगों ने किसी भी स्थिति में अपनी कर्मठता नहीं छोड़ी।

Wednesday, December 22, 2010

UTTRAKHAND SANTA CLAUSE



देखो-देखो बरफ़ गिरी है
कितनी प्यारी मखमल सी है
बर्फ़ के गुड्डे मन को भायें
चलो सभी के संग बनायें
गोल-मोल से लगते प्यारे
गाजर नाक लगाये सारे
आया जो क्रिसमस का मौसम
घर बाहर को कर दें रोशन
राजू क्यों है आज उदास
आओ चल कर पूछें पास
मम्मी बोली उसकी अब के
होंगे नहीं क्रिसमस पे तोहफ़े
उसने मां को खू़ब सताया
इसीलिये ये दंड पाया
सैन्टा उनको तोहफ़ा देते
मम्मी का जो कहना सुनते
हम अच्छे बच्चे बन जायें
सुंदर-सुंदर तोहफ़े पायें

Thursday, November 25, 2010

उत्तराखण्ड का पहाड़ डाड़ी काठी


मेर डण्डि कण्ठियों का मुलुक जैल्यु, बसन्त रितु मा जैयि -२
हैर बण मा बुराँसि का फूल, जब बण आग लगाण होला..
पीता पखों थैं फ्योलिं का फूल, पिन्ग्ला रंग मा रंग्याण होला ..
ळाइयां पैयां ग्वीराल फूलु ना-२, होलि धर्ति सजि देखि ऐइ …
बसन्त रितु म जैयि…
मेर डांडि....

रन्गील फागुन होल्येरोन कि टोलि, डांडि कांठियों रंग्यणि होलि...
कैक रंग म रंग्युं होलु क्वियि, क्वि मनि-मन म रंग्श्याणि होलि..
किर्मिचि केसरि रंग कि बाढ-२, प्रेम क रंगों मा भीजि ऐइ...
बसन्त रितु म जैयि….
मेर डांडि....

बिन्सिरि देय्लिओं मा खिल्दा फूल, राति गों-गों गितेरुं का गीत...
चैता का बोल, ओजियों का ढोल, मेरा रोंतेला मुलुके कि रीत...
मस्त बिग्रैला बैखुं का ठुम्का-२, बांदूं का लस्सका देखि ऐइ....
बसन्त रितु म जैयि...
मेर डंडि....

सैणा दमला र चैतै बयार, घस्यरि गीतों मा गुंज्दि डांडि...
खेल्युं मा रंग-मत ग्वेर छोरा, अट्क्दा गोर घम्डियंदि घंडि..
वखि फुन्डे होलु खत्युं मेरु भि बच्पन, -२ ऊक्रि सक्लि त ऊक्रि कि लैयि...
बसन्त रितु म जैयि...

मेर डण्डि कण्ठियों का मुलुक जैल्यु, बसन्त रितु मा जैयि??

Sunday, November 14, 2010

उत्तराखण्ड दागडियो दगडी चेटिंग


दागडिया बिगाड़ गेनी चेटिंग मा
हुनी छा अब हाकिंग भी चेटिंग मा
टाइम पास वे गे वू कु चेटिंग मा
क्या खुडी कि हुडी छा अब सेटिंग भी चेटिंग मा

दागडिया वे गेन बेकार अब चेटिंग मा
आंख भी होदन ख़राब यी चेटिंग मा
पहेली ता बोल्दन कि हम दोस्त छा
फिर बाद मा क्या बन जदन यी चेटिंग मा

खूब कर दन मस्ती दाग डिया चेटिंग मा
अब ता हार बात ही करदन दाग डिया चेटिंग मा
अब ता टेलीफोन भी बेकार वे गेन चेटिंग मा
अब ता सब बात हुनी छान ये चेटिंग मा



दाग डियो कि इंगलिश ख़राब वे गे चेटिंग मा
वे गेन सब दागडिया बदनाम ये चेटिंग मा
क्या मतलब होदू बात कनु कि पता चल गे अब सब ये चेटिंग मा
अब ता सब दाग डियो तय पता चल गे कि मोहोबत भी हुनी छा चेटिंग मा

Monday, November 8, 2010

दिवाली मुबारक


आई रे बग्वाल, कुछ करा रे धमाल ,
दिवा जालावा, अंध्या खेला,
घूमिक आवा थौला-मेला |

औलु यु मौका फ़िर अगला साल,
......आई रे बग्वाल, कुछ करा रे धमाल |
दिवाली मुबारक हो दग्ङया तुम्हार गाँव माँ भी ख्यलदा भेला छिल्लू का शुभ रात्री

आप सभी को दीपावली की शुभकामनायें

Tuesday, October 26, 2010

उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तराञ्चल),























उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तराञ्चल), उत्तर
भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण नवंबर २००० को कई वर्षों के
आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया
था। सन २०००२००६ तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में
स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम
...बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व
में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर
प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह
उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य
में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और
संस्कृत गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा
इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। से में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों

देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण
नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की
राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के
अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है।
राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को
बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार
तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर
योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बांध
परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनायें भी की जाती रही
हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध
परियोजना। इस परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गई थी और यह अन्ततः २००७ में
बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना
जाता है।

Friday, October 8, 2010

उत्तराखंड मा टिहेरी गढ़वाल जय चक्रबंदनी जोग माया खप्परभरनी


जय चक्रबंदनी जोग माया खप्परभरनी

जय चक्रबंदनी जोग माया खप्परभरनी
तू ही चामुंडा शैलपुत्री नंदा इंगला पिंगला दैत्याधाविनी
महानारी चंद्रघंटिका महाकालरात्रि कालीमाता
जब देवतों को अत्यचार हुए तब त्येर माता को जन्म हुए
राज राजेश्वरी गोरजा भवानी चमन्कोट चामुंडा
श्री शक्लेश्वर कार्तिकेय श्री देवी दैन्य संघारे
श्री गणेशाय नमः जाए नमः उद्हारिणी पिंगला महेश्वरी
महेश्वरी दैत्यधाऊ गेमन मिचाऊ तब त्वे देवी कै जाप सुनाऊ
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
जय बोला तेरी जय बोला
जय बोला तेरी जय बोला
बल गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
बेली बधान माता बल तेरा मैती होला
बेली बधान माता बल तेरा मैती होला
मल बधान जालू माँ नंदा जी को डोला
शिव कैलाश जालू माँ नंदा जी का डोला
सिद्धपीठ नौटी से चले राज जात
त्येर मैतार नौटी से चले राज जात
नन्द केसरी में हौला गढ़ कुमो का साथ
नन्द केसरी में हौला गढ़ कुमो का साथ
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
वर्षा पुजा हूनी वैदिनी का ताल
वर्षा पुजा हूनी वैदिनी का ताल
देख तेरा हाथून हवे राज्ञसू को काल
देख तेरा हाथून हवे राज्ञसू को काल
बारहू साल में त्येर चौसीघा हवे खांडू
बारहू साल में त्येर चौसीघा हवे खांडू
बान गो माँ भाई त्येरु देवता रे दुलातु
बान गो माँ भाई त्येरु देवता रे दुलातु
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
रजा कनकपाल न चंदपुरान बती
रजा कनकपाल न चंदपुरान बती
कन्नोज का राजा छाणी दैज देन भेटी
कन्नोज का राजा छाणी दैज देन भेटी
१ बार ऊ भी बल माला खून ग्येन
१ बार ऊ भी बल माला खून ग्येन
अरे येन भग्यान हवेन नि घर बोडी एइन
अरे येन भग्यान हवेन नि घर बोडी एइन
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
अध बाटा मलानी कुपुत्र हून ल्हेगे
अध बाटा मलानी कुपुत्र हून ल्हेगे
नर संहार ह्वेगे माता कुचील हवे गे
नर संहार ह्वेगे माता कुचील हवे गे
तब से नार का कालू न बनी रूप कुंद
तब से नार का कालू न बनी रूप कुंद
माँ कु श्राप ल्हेगे बची अस्थि और मुंड
माँ कु श्राप ल्हेगे बची अस्थि और मुंड
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
भद्रेस्वर निस्मा चा कडू रो को धाम
भद्रेस्वर निस्मा चा कडू रो को धाम
६ मेहना बवून ६ दसौली का नाम
६ मेहना बवून ६ दसौली का नाम
पडो हो नंदा कु बल पैलू कुल सारी माँ
पडो हो नंदा कु बल पैलू कुल सारी माँ
जख बिराज मान चा भगवती काली माँ
जख बिराज मान चा भगवती काली माँ
जय हो नंदा देवी तेरी जय बोला
गढ़ कुमो की माता मेरी जय बोला
रूप कुंद पित्रू तर्पण दिए जांदु
रूप कुंद पित्रू तर्पण दिए जांदु
होम कुंद खाडू चौसिंघ पूजी जांदु
होम कुंद खाडू चौसिंघ पूजी जांदु
माता ९ दुर्गा की पुनि आरती पूजा देना
कैलाश की और चौसिंघ पाठी देना

Sunday, October 3, 2010

उत्तराखंड में बस सेवाएं स्थगित


गढ़वाल मोटर आनर्स यूनियन ने अपनी बस सेवा बरसात खत्म होने तक स्थगित कर दी है।

उत्तराखंड में पिछले पांच दशकों में सर्वाधिक वर्षा से हो रहे भूस्खलनों से अधिकांश मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए है।

मार्ग ट्रटने के कारण गढ़वाल मण्डल में हजारों बसों का संचालन करने वाली गढ़वाल मोटर आनर्स यूनियन (जीएमओयू) ने अपनी बस सेवा बरसात खत्म होने तक स्थगित कर दी है। जिससे पहाड़ों में जीवन की गति थम सी गयी है। जीएमओयू ने यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा तथा सुविधा के तहत लिया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक जीएमओयू ने आपदा से बचने के लिए बस सेवाएं बंद कर दी है। यूनियन के अधिकारियों के अनुसार सड़कें क्षतिग्रस्त होने से यात्रियों को जगह जगह पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बसों का संचालन बन्द हो जाने से गढ़वाल के पौडी, चमोली और रूद्रप्रयाग जिलों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह और टिहरी, उत्तरकाशी और देहरादून में आंशिक रूप से ठप्प हो गयी है।